माँ का आँचल

माँ का आँचल कविता माँ के प्रेम और ममता पर आधारित हिंदी रचना

लक्ष्मी सिंह ‘रूबी’ जमशेदपुर (झारखंड)

माँ का आँचल थाम के, बच्चे सोए खूब।
उसकी शीतल छाँव है, जैसे कोमल दूब।।

माँ की ममता धूप में, बन जाती है छाँव।
जलता मन पाता सदा, शीतल सुंदर ठाँव।।

माँ की गोद सराय है, दुखियों का विश्राम।
थककर जो भी आ गया, पाया है आराम।।

माँ की हँसी उजास है, जीवन की पहचान।
बस उसकी मुस्कान में, बसता सकल जहान।।

माँ की बातों को रखूँ, अपने मन की थाल।
उनसे ही तो बढ़ रहा, यह जीवन हर हाल।।

माँ की डाँट होती दवा, करती दुख को दूर।
गलती हम करते मगर, प्रेम करे भरपूर।।

माँ के बिन सूना लगे, हर आँगन घर द्वार।
उसकी ममता से चले, यह सुंदर संसार।।

माँ की सेवा ही रही, इस दुनिया में धर्म।
उसके चरणों में मिले, जीवन का हर मर्म।।

माँ का आँचल ओढ़कर, दूर करें अँधियार।
उसकी ममता दीप बन, कर दे जग उजियार।।

माँ मेरी ताकत रही, माँ ही मेरा मान।
माँ की चरणों में बसे, मेरा सदा जहान।।

लेखिका के बारे में-

लक्ष्मी सिंह ‘रूबी’

संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को शब्दों में ढालने की अद्भुत क्षमता रखने वाली लक्ष्मी सिंह ‘रूबी’ हिंदी और भोजपुरी साहित्य की एक प्रतिष्ठित हस्ताक्षर हैं। कविता, लघुकथा, ग़ज़ल, मुक्तक, गीत, संस्मरण और दोहा जैसी विविध विधाओं में उनकी लेखनी सहजता और गहराई के साथ प्रवाहित होती है।उनकी रचनाओं में स्त्री मन की संवेदनाएँ, समाज की सच्चाइयाँ और जीवन के विविध रंग अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उभरते हैं। सरल भाषा में गूढ़ भावों को व्यक्त करना उनकी विशेषता है, जो पाठकों के हृदय को सीधे स्पर्श करती है। 28 अगस्त को जन्मी लक्ष्मी सिंह ‘रूबी’ को साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है, जिनमें वर्ष 2024 का कुमारी राधा स्मृति सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त साहित्यकार सम्मान, नारी रत्न सम्मान, सरस्वती सम्मान और अखिल भारतीय साहित्य परिषद सहित अन्य प्रमुख संस्थाओं के सम्मान शामिल हैं। उनकी रचनाएँ अनेक साझा संकलनों तथा राष्ट्रीय चेतना पत्रिका, दी ग्राम टुडे और प्रथम न्याय न्यूज जैसे मंचों पर निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं। इसके अतिरिक्त, उनकी काव्यधारा कई बार आकाशवाणी जमशेदपुर से भी प्रसारित होकर श्रोताओं तक पहुँची है।
लेखन के साथ-साथ पेंटिंग और स्टिचिंग में उनकी गहरी रुचि उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को और भी समृद्ध बनाती है। ‘रूबी’ की लेखनी केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि भावनाओं का जीवंत संसार है. जो पाठकों को सोचने, महसूस करने और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करता है।



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