
डॉ. अनामिका दुबे “निधि” मुंबई
अपनों से भले गैर मिलाती है ज़िन्दगी,
सुकून भरा ठौर दिलाती है ज़िन्दगी।
कभी खुशी का गम का एहसास देती है,
हर पल नये रंग दिखाती है ज़िन्दगी।
जो खो गए हैं राह में उन सबको ढूंढ कर,
फिर से नये सफर पे ले जाती है ज़िन्दगी।
मंज़िल की चाह में हर इक कदम सम्भलकर,
हर मोड़ पर सबक सिखाती है ज़िन्दगी।
फूलों की तरह महके जो अपने दिल में,
उनकी यादों से दिल को सजाती है ज़िन्दगी।
चाहे हो कैसी भी हर हाल में ये सच है,
कभी सिखाती कभी बताती है ज़िन्दगी।
मंज़िलें कभी पास कभी दूर नज़र आईं,
क़िस्मत के खेल खूब दिखाती है ज़िन्दगी।
जो दर्द मिला राह में उन सबका शुक्रिया,
कभी हँसाती कभी रुलाती है ज़िन्दगी।
दोस्तों का साथ हो तो राहें भी आसान,
वरना तन्हाई से लड़ाती है ज़िन्दगी।
ख्वाबों का हर सफर लगता है हसीं,
सपनों में देखो रंग भर जाती है ज़िन्दगी।
हर दिन नई सीख का पैगाम लेकर,
हर सुबह उम्मीद जगाती है ज़िन्दगी।
लेखिका के बारे में-
डॉ. अनामिका दुबे “निधि”
हिंदी प्रवक्ता के रूप में 4 वर्ष तथा अध्यापिका के रूप में 2 वर्ष कार्यरत रहीं। वे “राष्ट्रीय साहित्य नवरत्न मंच” की संस्थापिका हैं और विभिन्न मंचों व FM पर काव्य पाठ कर चुकी हैं। उनकी रचनाएँ दैनिक भास्कर सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उन्हें वाचस्पति मानद, कलम रत्न, साहित्य संगिनी, अजातशत्रु और साहित्य प्रभा जैसे कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। उनकी एकल पुस्तक “मेरी भावनाएं” प्रकाशित है और वे 100+ साझा काव्य संकलनों में योगदान दे चुकी हैं।
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