तिलमिलाहट

तिलमिलाहट: जब संस्कारों की आड़ में छिपा सच सामने आया

रश्मि लहर, लखनऊ

“दीदी! तुम्हारा सामान मेज़ पर रखा है,” कहते हुए तुषार ने एक काली पन्नी मेज़ पर रखी और अपनी साइकिल खड़ी करने लगा। तभी उसे दादी की चुभती हुई आवाज़ सुनाई दी—

“क्यों सुषमा! सारे संस्कार घोलकर पी गई हो तुम सब? क्या अब एक भाई अपनी बहन का प्राइवेट सामान लाने लगा है? हमने सौ बार मना किया था कि इतने बड़े स्कूल में बच्चों को न पढ़ाओ कि वे इतने आधुनिक हो जाएँ कि अपने संस्कार ही भूल जाएँ!”

वे थोड़ा और तेज़ आवाज़ में बोलीं-
“इतने दिनों से मैं और तुषार के पापा कोठी की साज-संवार में लगे हैं। चुनाव पास आ रहा है, बड़े लोगों का आना-जाना लगा रहेगा! अब बड़े लोगों के कुछ अलग ही संस्कार होते हैं, पर मैं देख रही हूँ तुम लोग सब भूलते जा रहे हो!”

तुषार अपनी दादी के गुस्से से परिचित था। वह जानता था कि मम्मी के गाँव जाते ही दादी बेचैन हो जाती हैं। इस बार तो वे लोग पूरे दो माह बाद लौटे थे। यही सोचते हुए तुषार ने अपनी माँ को आवाज़ दी—

“माँ! सुनो न, दादी…”

कहते-कहते वह सहसा रुक गया।

सामने मम्मी, कामवाली बाई की युवा बेटी सोनी का हाथ पकड़े कमरे से निकल रही थीं। वे बोलीं-“हाँ तुषार! मैंने अम्मा जी की बात सुन ली है, और अब तुम्हारे पापा के संस्कार भी देख रही हूँ!” यह कहते हुए उन्होंने सोनी को अपनी सास के सामने लाकर खड़ा कर दिया। सोनी के हाथ में प्रेगान्यूज़ की पॉज़िटिव रिपोर्ट थी। वह रोते-रोते कह रही थी-“आंटी! मैं क्या करूँ, कहाँ जाऊँ आखिर? मेरी तो ज़िंदगी बर्बाद हो गई!”

लेखिका के बारे में-


रश्मि ‘लहर’
समकालीन हिंदी साहित्य की एक सशक्त और बहुआयामी हस्ताक्षर हैं, जिनकी लेखनी संवेदनाओं की सूक्ष्म तरंगों को शब्दों में जीवंत कर देती है। लखनऊ निवासी रश्मि जी ने हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में शोधकार्य में संलग्न रहते हुए भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में निजी सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

कविता, ग़ज़ल, गीत, दोहा, कहानी, लघुकथा, निबंध, समीक्षा, आलोचना और संस्मरण जैसी विविध विधाओं में समान अधिकार से लेखन करने वाली रश्मि ‘लहर’ की रचनाएँ चालीस से अधिक साझा संकलनों तथा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके लेखन का प्रसारण दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे प्रतिष्ठित मंचों से भी हुआ है, जो उनकी सृजनात्मकता की व्यापक स्वीकृति का प्रमाण है।उनका चर्चित कहानी संग्रह “अठारह पग चिह्न” पाठकों और साहित्यिक जगत में विशेष सराहना प्राप्त कर चुका है। साहित्य सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय सहभागिता के रूप में भी परिलक्षित होती है।

रश्मि ‘लहर’ को ‘आजीवन उपलब्धि सम्मान’ सहित लगभग चालीस प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी लेखनी न केवल हृदय को स्पर्श करती है, बल्कि समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित भी करती है—यही उनकी रचनात्मकता की सबसे बड़ी शक्ति है।

4 thoughts on “तिलमिलाहट

  1. बहुत हृदयस्पर्शी लघुकथा है।
    कड़वा सच !

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