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विंध्यवासिनी माता

माँ विंध्यवासिनी की सुंदर प्रतिमा, लाल चुनरी और स्वर्ण आभूषणों से सजी हुई, नवरात्रि पूजा का दृश्य

प्रतिभा दुबे, प्रसिद्ध लेखिका, ग्वालियर

हे विंध्यवासिनी पर्वत बैठी,
मैया ऊँचा भवन सजाए,
भक्तों की सुनती है मैया,
भक्त सब दौड़े-दौड़े आए।।

श्रृंगार कर मैया तेरा हम,
मां हम पर कृपा बरसाए,
कुमकुम, केसर, चंदन से,
माता का तिलक सजाए।।

सुवा चोली मैया के अंग विराजे,
मैया लाल चुनरी तुझे हम उड़ाए,
कंगन, चूड़ा, पायल, बिछिया, टीका,
मैया के झुमके हम खूब सजाए।।

आई नवरात्रि मैया की नौ दिन,
भेंटें, लांगुरिया मंदिर में सब गाए,
अकबर ने छत्र चढ़ाया स्वर्ण का,
हम तो फूलों की माला बनवाए।।

भक्तों पर कृपा करती है मैया,
तेरे लिए छप्पन भोग सजाए,
चौमुखी दिया रखें घर-आंगन,
मैया तेरो भवन ऊँचा सजाए।।

थकान हमारी सारी मिट जाए,
मैया का नाम हम लिए जाएं,
विंध्यवासिनी पर्वत बैठी-बैठी,
भक्तों पर अपनी ममता लुटाए।।
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