सही सोने की मुद्रा के साथ ये आदतें भी घटा सकती हैं हार्ट अटैक का खतरा
हृदय विशेषज्ञों के अनुसार रात के समय दिल के दौरे का जोखिम केवल बीमारी पर नहीं, बल्कि सोने की मुद्रा और नींद से जुड़ी आदतों पर भी निर्भर करता है. हाल के अध्ययनों और अनुभवी आईसीयू नर्सों की सलाह के मुताबिक, बाईं करवट हल्के मुड़े घुटनों के साथ सोना दिल पर दबाव कम करता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है. हालांकि, केवल मुद्रा बदलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कुछ अतिरिक्त सावधानियां अपनाना भी जरूरी है.
नियमित नींद का समय बनाएं
रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने से शरीर की जैविक घड़ी संतुलित रहती है. इससे हृदय की धड़कन और रक्तचाप नियंत्रित रहता है. अनियमित नींद और देर रात तक जागना दिल पर अतिरिक्त तनाव डाल सकता है.
सोने से पहले भोजन और स्क्रीन से दूरी
रात में सोने से कम से कम दो घंटे पहले भारी, तला-भुना और अधिक नमक वाला भोजन करने से बचना चाहिए. ऐसा भोजन ब्लड प्रेशर और एसिडिटी बढ़ा सकता है. इसके साथ ही मोबाइल, टीवी और लैपटॉप जैसी स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, इसलिए सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन से दूरी बनाना फायदेमंद होता है.
सांस से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करें
खर्राटे, बार-बार नींद खुलना या सोते समय सांस रुकने की समस्या स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं. यह स्थिति हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाती है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराना आवश्यक है.
नशे से दूरी और तनाव नियंत्रण जरूरी
शराब और धूम्रपान रात में दिल की धड़कन को अनियमित कर सकते हैं और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग, गहरी सांस लेने के अभ्यास या ध्यान करने से मानसिक तनाव कम होता है, जिससे दिल को आराम मिलता है.
डॉक्टर की सलाह से अपनाएं सही व्यवस्था
जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या मधुमेह है, उन्हें तकिया, गद्दे और सोने की मुद्रा का चयन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि सही नींद, संतुलित जीवनशैली और नियमित जांच के साथ नींद की आदतों में छोटे बदलाव भी रात में होने वाले हृदय संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
