“कभी खुद के लिए भी जी ले माँ…”
जाने हमेशा ऐसा क्यों लगता है सारे असंभव काम आप ही कर सकती हो… जादुई सी बेतरतीब से बंधे माँ के जूडे से हमेशा बाल की एक पतली सी लट छूट जाया करती थी, जो पसीने से गर्दन में चिपकी रहती। इतनी गर्मी में रोटियां बनाते हुए माँ पसीने से नहा उठती। सब काम निपटा…
