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कालरात्रि माँ

“गर्दभ वाहन पर विराजित, खड्ग-खप्परधारी कालरात्रि माँ, शत्रु का दमन करने वाली और भक्तों को समृद्धि देने वाली माता। सप्तम दिन पूजा करने से दूर होती हैं बाधाएँ, और अर्पित रक्त पुष्प व शहद से होती है शुभ फलप्राप्ति।”

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मैं नहीं जानती..

पितरों के प्रति सच्चे प्रेम, समर्पण और सेवा की भावनाओं को दर्शाता है। लेखक बताती हैं कि मृत्यु के बाद क्या होता है, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन जीवन में जो स्नेह, सेवा और प्रेम उन्होंने अपने पितरों को दिया, वही उनकी वास्तविक श्रद्धांजलि और पूजा है। जल-तर्पण, श्रद्धा, समर्पण और सेवा जैसी परंपराओं का सार वही है जो जीवन में किए गए कर्मों में प्रकट होता है। यह पाठ याद दिलाता है कि सच्चा धर्म और श्रद्धा भौतिक दान या रस्मों में नहीं, बल्कि अपने हृदय, कर्म और प्रेम में निहित होता है।

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