मुद्दों की बात हम करते नहीं…
हम इस देश में असल मुद्दों पर बात करना पसंद नहीं करते। हमें झंझट पसंद नहीं, इसलिए टूटी सड़कों, मिलावट वाले खाने, बढ़ते कंक्रीट, बिजली-पानी की किल्लत तक सब सहते जाते हैं। भ्रष्टाचार और महंगाई बढ़ती रहे, पर्चे बिकते रहें, कूड़े के पहाड़ बन जाएँ फिर भी फर्क नहीं पड़ता। हम तमाशा देखते रहते हैं। असल में हमें मुद्दे नहीं, आराम चाहिए। यही वजह है कि हालात बदलते नहीं और हम भी नहीं।
