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"एक कपल बारिश में साथ बैठे हुए, भावनात्मक लेकिन अनिश्चित रिश्ते को दर्शाता दृश्य"

“तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं…”

प्यार है, अपनापन है, साथ बिताए पल हैं… लेकिन रिश्ते का कोई नाम नहीं। आज की बदलती दुनिया में ऐसे रिश्ते तेजी से बढ़ रहे हैं, जिन्हें नई पीढ़ी Situationship के नाम से जानती है। 1975 की फिल्म आंधी के गीत “तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं…” की भावनाओं से लेकर आज के युवाओं के रिश्तों तक, यह लेख समझने की कोशिश करता है कि आखिर क्यों लोग जुड़ाव तो चाहते हैं, लेकिन कमिटमेंट से दूर रहते हैं। क्या सिचुएशनशिप नया रिश्ता है या पुराने दौर के अनकहे प्रेम का नया नाम? आइए जानते हैं रिश्तों की बदलती कहानी।

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एक आधुनिक शहर के कैफे में बैठे युवक और युवती, दोनों अपने फोन में व्यस्त हैं, पास होते हुए भी उनके चेहरे पर भावनात्मक दूरी और सोच में डूबे होने का एहसास झलक रहा है।

यंगस्टर का प्रेम

युवा दिल बहुत नाज़ुक होता है. छोटी-सी बात भी उसे खुशी से भर सकती है और उतनी ही जल्दी आहत भी कर सकती है. अक्सर आकर्षण को ही प्रेम समझ लिया जाता है, क्योंकि किसी की मुस्कान, बात करने का अंदाज़ या स्टाइल दिल को छू जाता है. लेकिन सच्चा प्रेम इससे कहीं आगे होता है. वह व्यक्ति के विचारों, उसके व्यवहार और उसके साथ बिताए गए सच्चे पलों से धीरे-धीरे गहराता है.

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