•••साहित्य अकादमी की चारों पीठ पर निदेशक नियुक्त

साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अंतर्गत चार सृजन पीठ कार्यरत रहती हैं। इन चारों पीठ पर निदेशकों की नियुक्ति करते हुए प्रेमचंद सृजन पीठ पर उज्जैन के ही लेखक-व्यंगयकार मुकेश जोशी को निदेशक मनोनीत किया है। इस पद पर पिछले चार साल से अनीता पंवार पदस्थ रहीं लेकिन इन चार सालों में लगा ही नहीं कि इस पीठ की साहित्यिक गतिविधियों से कोई ताल्लुक भी है।

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चरित्रहीन

जानकी ने चारपाई का सहारा लिया, पर पाँव डगमगा गए। गले में फाँस-सी अटकी थी, आँखें सूखी होकर भी जल रही थीं। सफ़ाई देने को शब्द नहीं थे, और सुनने वाला भी कौन था? घर की चौखट लाँघते ही उसके कदम रात के सन्नाटे को चीरती ट्रेन की चीख में खो गए—आज उस चीख में शामिल थी एक और चीख।

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इंतजार में अमृता प्रीतम…

यह रचना अमृता प्रीतम, साहिर और इमरोज़ की अमर प्रेमकथा की संवेदनाओं को छूती है। लेखिका के अंतर्मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या स्वयं वह अमृता जैसी हो सकती है, जिसे साहिर का अल्हड़ किन्तु अनकहा प्रेम मिला और इमरोज़ का निःस्वार्थ साथ। प्रेम की यह त्रयी—अनकहे भाव, निस्वार्थ समर्पण और अनंत प्रतीक्षा—मानव हृदय के उस गूढ़ कोने को उजागर करती है जहाँ प्रेम अपनी सीमाओं और परिभाषाओं से परे जाकर केवल “होने” में अर्थ पाता है। यही सोच अमृता को कालजयी बनाती है और यही प्रश्न आधुनिक मन को बेचैन करता है—क्या अब भी ऐसा दुर्लभ प्रेम संभव है?

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