bhagwa- hindu -india

मैं ही ज्योति, मैं ही अनंत

जिसे तुम बाहर ढूँढते फिर रहे हो, वह सब तुम्हारे भीतर है। धरती के छोर से लेकर आकाशगंगाओं के पार तक, जो भी दिखाई देता है, वह उसी एक ऊर्जा की भिन्न–भिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं। सूर्य की गर्मी, चाँद की शीतलता, समुद्र की गहराई, हिमालय का शौर्य, गंगा की पवित्र धार सब उसी शक्ति के रूप हैं। वह शक्ति न किसी दिशा में सीमित है, न किसी समय में बँधी। वह अनंत है और सर्वव्यापी है। भगवा इसी अनंत प्रकाश का प्रतीक है .जो न कहीं शुरू होता है और न कहीं समाप्त।
जो इसे पा लेता है — वह समझ जाता है कि खोज बाहर नहीं, भीतर की ओर मुड़ने में है।
सब उसी से जन्मा है और अंततः उसी में विलीन होना है।

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क्षणभंगुर जीवन मेरा…

नीलम राकेश, प्रसिद्ध लेखिका, सीतापुर रोड लखनऊ अपने बरामदे में आराम कुर्सी पर बैठे शेलेन्द्र कुमार सिन्हा अपलक एक छोटे बादल के टुकड़े को आकाश में अकेले अठखेली करते देख रहे थे। उनके अन्तस का एकाकीपन पूरी तीव्रता के साथ उनके ऊपर हावी था। अपना जीवन उन्हें इस निरीह क्लांत बादल के टुकड़े जैसा प्रतीत…

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जाग रे इंसान

गुरु मनुष्य को समझाते हैं कि हे इंसान, अब सो मत, जाग जा। तेरे जीवन का अधिकांश समय काम और जिम्मेदारियों में बीतता है, परंतु यदि तू तेईस घंटे कर्म करता है तो एक घंटा प्रभु के ध्यान के लिए अवश्य निकाल। यही तेरे जीवन का सच्चा संतुलन है।

मनुष्य का यह शरीर नौ द्वारों से बना है, जिनसे वह सांसारिक कार्य करता है। परंतु जब वह शब्द-ध्वनि के माध्यम से दसवें द्वार से जुड़ता है, तब उसे भगवान का साक्षात्कार होता है। यही शाश्वत सत्य है।शब्द ही वह शक्ति है जिसने धरती और आकाश को थाम रखा है। सृष्टि की जननी शब्द है, और शब्द ही प्रकाश देता है। जो इस सत्य को पहचान लेता है, वही ईश्वर की निकटता को प्राप्त करता है।
जो मनुष्य तन और मन के बंधनों से मुक्त नहीं होता, वह कालचक्र में फँसा रहता है। ऐसा व्यक्ति जीवन भर संघर्ष करता है और अंततः उसे सबकुछ त्यागकर जाना पड़ता है।

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