महाभारत की सभा में खड़ी द्रौपदी, पांडवों और भीष्म के सामने प्रश्न उठाती हुई

पुरुषार्थ

महाभारत के द्यूत क्रीड़ा प्रसंग के बाद का एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक चित्रण है, जहाँ द्रौपदी पांडवों और भीष्म पितामह के सामने अपने अपमान और न्याय के प्रश्न उठाती हैं। यह रचना न केवल पौराणिक घटना को जीवंत करती है, बल्कि आज के समाज में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता को भी उजागर करती है। जानिए सच्चे पुरुषार्थ का अर्थ क्या है।

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शिव पार्वती का दिव्य मिलन दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता, तप और समर्पण का प्रतीक

आत्मा का समर्पण

हिमालय की गोद में जन्मी पार्वती के मन में केवल महादेव का ही नाम बसा था। उन्होंने कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के साथ हर क्षण शिव को पुकारा। ऋतुएँ बदलती रहीं, समय बीतता रहा, पर उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया।

कैलाश पर समाधि में लीन शिव के भीतर भी एक सूक्ष्म स्पंदन था, जो पार्वती की भक्ति को महसूस कर रहा था। जब दोनों की दृष्टि मिली, तो वह मिलन केवल प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण समर्पण का प्रतीक बन गया जहाँ ‘मैं’ समाप्त होकर ‘हम’ का जन्म होता है।शिव और पार्वती का यह संग सृष्टि का आधार है, जो प्रेम, विश्वास और ऊर्जा का अनंत प्रकाश फैलाता है।

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श्रीराम भक्ति कविता दर्शाता हुआ दिव्य और शांत भाव का दृश्य

श्रीराम भक्ति कविता

मर्यादा, त्याग और सत्य की अनुपम मिसाल— श्रीराम के जीवन पर आधारित यह प्रेरणादायक हिंदी कविता भक्ति और धर्म का गहरा संदेश देती है। इस सुंदर रचना के माध्यम से जानिए कैसे श्रीराम के आदर्श आज भी हमारे जीवन को दिशा देते हैं।

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माँ शैलपुत्री

सुनीता मलिक सोलंकी, मुजफ्फरनगर (उप्र) प्रथम शैलपुत्री देवी,आज नवरात्र में कृपा बरसाए माँ।भक्तों ने सारे तेरे मंदिर सजाए माँ।। पहला दिन शैलपुत्री स्वरूप,पर्वतराज हिमालय की पुत्री तू।पूर्व जन्म में राजा दक्ष की थी पुत्री,तब माँ का नाम पड़ गया था सती।। तेरी महिमा सारी कह न सके माँ,भक्तों ने सारे तेरे मंदिर सजाए माँ।। सती…

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