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खिड़की के पास बैठा उदास व्यक्ति, विरह और प्रतीक्षा के भाव दर्शाता दृश्य।

दीद उसकी

यह ग़ज़ल प्रेम, विरह और प्रतीक्षा की सूक्ष्म अनुभूतियों को शब्द देती है। मीरा, कृष्ण और स्मृतियों के प्रतीकों के माध्यम से प्रेम की पीड़ा और गहराई को सुंदर ढंग से व्यक्त किया गया है।

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अकेली महिला की उदास अभिव्यक्ति – हिज्र और दर्द को दर्शाती हिंदी ग़ज़ल इमेज

हिज्र, सब्र और बदलते रिश्ते

यह ग़ज़ल सिर्फ मोहब्बत की कहानी नहीं, बल्कि खुद से मिलने का एक सफर है। इसमें हिज्र का दर्द है, सब्र की तपिश है और बदलते रिश्तों की कड़वी सच्चाई भी।

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चाँदनी रात में डायरी पर लिखी प्रेम ग़ज़ल, पास में रखा फाउंटेन पेन और हल्की रोशनी

ग़ज़ल

“तिरी पलकों के साये में” एक भावपूर्ण हिंदी ग़ज़ल है जो प्रेम की नज़ाकत, रिश्तों की अहमियत, इल्म की रोशनी और माँ-बाप के अनकहे दर्द को बेहद संवेदनशील अंदाज़ में प्रस्तुत करती है। हर शेर जीवन की सच्चाई से रूबरू कराता है।

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एक उदास महिला खिड़की के पास बैठी है, आंखों में आँसू, हाथ में पुरानी चिट्ठी, धुंधली रोशनी में प्रेम और विरह की भावना झलकती हुई।

इश्क़ की इंतहा

राँची, झारखंड की कवयित्री अर्पणा सिंह की यह मार्मिक ग़ज़ल प्रेम, विरह, तड़प और आत्मिक समर्पण की गहराइयों को उजागर करती है। “ज़िंदगी में तुम नहीं तो ज़िंदगी कुछ भी नहीं” पंक्ति के माध्यम से प्रेम की पूर्णता और विरह की पीड़ा का संवेदनशील चित्रण किया गया है।

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