राहें और मंज़िल

हर व्यक्ति की मंज़िल एक ही होती है, पर रास्ते अलग-अलग होते हैं। कोई सीधा लिफ्ट लेकर अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता है, तो कोई धैर्य और परिश्रम के साथ सीढ़ियाँ चढ़ता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पहले स्वयं सीढ़ियाँ बनाते हैं और फिर उसी पर चढ़कर अपनी ऊँचाई तक पहुँचते हैं। अंततः सबको अपनी-अपनी राह चुननी पड़ती है। तय करना होता है कि कौन-सा रास्ता उसका है, और फिर बिना रुके, बिना थके बस आगे बढ़ते जाना होता है। जो कदम बढ़ाता है, वही मंज़िल तक पहुँचता है।

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उम्मीदों की खिड़की से

ज़िंदगी में कितनी ही मुश्किलें क्यों न आएँ, उम्मीदों की खिड़की हमेशा खुली रहनी चाहिए। दुनिया कुछ भी कहे, लेकिन अपने हौसले को मज़बूत बनाए रखना ज़रूरी है। आंधियाँ आएँ तो भी दिल का दिया जलता रहना चाहिए। इंसान को पत्थर नहीं बनना है, बल्कि टूटकर और तराशकर अपने आप को बेहतर बनाना है। इम्तिहान तो जीवन में बार-बार आएँगे, लेकिन हर बार हमें अपने लक्ष्य पर टिके रहना है। यही उम्मीद और यही हौसला हमें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं।

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