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मन 

यह कविता रिश्तों में पसरी हुई खामोशी और मन की गहराइयों में उपजी पीड़ा का चित्रण करती है। कवि कहता है कि यह खामोशी, मन को एक निर्जल और सूने कुएँ में धकेल देती है, जहाँ आकुलता और विकलता का साया छा जाता है। वहाँ न कोई चाहत होती है, न उम्मीद—नव अंकुर फूटने की संभावना भी नहीं।मन के किसी कोने में आशाएँ और अभिलाषाएँ सुंदर यादों की पोटली बनकर धरी रह जाती हैं। हर अहसास धीरे-धीरे पिघलकर पतझड़ के मौसम में बदल जाता है, और अंततः यह मन एक बांझ धरा की तरह फट पड़ता है।

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जीवन एक अमूल्य अभिलेख : नफ़रत से हारो मत

आज का जीवन बहुत उलझा हुआ है जहाँ सब कुछ अनिश्चित है—साँस से लेकर रिश्तों तक, ठहराव से लेकर बहाव तक। नई पीढ़ी चकाचौंध और भटकाव के बीच उलझ रही है, जबकि यही स्वतंत्रता और खुले आकाश की राह पिछली पीढ़ियों की संघर्षशील महिलाओं ने तैयार की थी। इस संदर्भ में ओपरा विनफ्रे का जीवन प्रेरणा देता है, जिन्होंने नफ़रत और कठिनाइयों से हार न मानकर ईमानदारी और साहस से अपने साधारणपन को असाधारण बना दिया। उनका संदेश स्पष्ट है—झूठ से बचो, ईमानदार रहो, और भय की जगह साहस को चुनो।

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अब मैं खाली हूँ…

भावनात्मक टूटने और भीतर के खालीपन को मार्मिक ढंग से चित्रित है। शुरुआत में बहुत समझाने, सवाल करने और दूरी मिटाने की कोशिश की, लेकिन समय के साथ शब्द थक गए, मन बुझने लगा और शिकायतें भीतर ही दब गईं। अब उसके दिन रसोई की भाप, बरामदे की धूल और घड़ी की टिक-टिक में गुजरते हैं—साथी के साथ नहीं, बल्कि अकेलेपन में।
जब साथी पुरानी यादों और अधूरे वादों के साथ लौटता है, तो भीतर कोई उत्साह या उम्मीद नहीं जागती। आँगन का चाँद, दीपक और हथेलियों का उजाला बहुत पहले खो चुके हैं। वक्ता अब खुद को एक खाली घर मानती है, जहाँ साथी महज़ मेहमान है और प्रेम एक पुरानी वस्तु बनकर कहीं सुरक्षित रख दिया गया है।

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