Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

तेरी बिंदिया रे…..

जहां शायरों ने, कवियों ने, औरत की सुंदरता के लिए अनेकों उपमानों का प्रयोग किया है, जैसे झील सी गहरी आंखें, हिरण सी सुंदर आंखें, सुराही दार गर्दन, मोरनी सी चाल, वहीं एक प्रेमी, अपनी प्रेमिका की बिंदी पर मर मिटा है,और वह चाहता है कि चाहे वह और कोई श्रृंगार करें या ना करें ,सिर्फ एक छोटी सी बिंदी वह अपने माथे पर लगा ले, और उसे किसी भी उपमान की जरूरत नहीं होगी।

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पैंतीस-चालीस की स्त्री

“पैंतीस-चालीस की स्त्री—घर की रौनक, रिश्तों की संरक्षक, प्रेम और वात्सल्य की सजीव प्रतिमूर्ति। बिना किसी दवा या शौक के, जीवन में खुशियाँ और आशा फैलाती। सच में, ये स्त्री कितनी खूबसूरत होती है।”

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चांद को ग्रहण

चाँद को ग्रहण लगने की बात केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वासों से जुड़ी है। प्रेम का प्रतीक यह चाँद कभी उपहास का पात्र नहीं बन सकता। सच तो यह है कि चाँद को ग्रहण नहीं, बल्कि नज़र लगती है—क्योंकि हर पूर्णिमा को पूरी दुनिया उसे निहारती है, उसकी सुंदरता को नज़र भर-भरकर देखती है। यही कारण है कि कभी वह बादलों में छिप जाता है, तो कभी लोग उसे नज़र उतरने के लिए दुआओं और टोटकों में बाँध देते हैं। वास्तव में चाँद सदा निर्मल है, ग्रहण तो हमारी धारणाओं का है।

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