मुंबई में आयोजित कवि नीरज शताब्दी स्मरण कार्यक्रम का दृश्य

कवि नीरज : स्मृतियों में बसा एक उजला व्यक्तित्व

कवि गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ को याद करना केवल एक रचनाकार को स्मरण करना नहीं, बल्कि उस युग को पुनः जीवित करना है, जिसमें कविता जीवन का उत्सव और संघर्ष का स्वर थी। मुंबई में आयोजित ‘शताब्दी स्मरण’ कार्यक्रम में साहित्यकारों ने नीरज के काव्य, व्यक्तित्व और गीतों के विविध आयामों पर विचार रखे।

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प्रेम और विश्वास को दर्शाती हिंदी कविता – तुम राज़दां हो मेरी

मनमीत

तुम मेरे जीवन का वह विश्वास हो, जो अँधेरों में भी राह दिखाता है। जब संसार डगमगाता है, तब तुम्हारी मौजूदगी मुझे स्थिर रखती है। यह साथ किसी वचन या शपथ से बड़ा है. यह आत्मा की स्वीकृति है, जहाँ भय का कोई स्थान नहीं। तुम्हारे इश्क़ में मुझे सुकून मिला है, ऐसा सुकून जो प्रश्न नहीं करता, केवल स्वीकार करता है। हम दो शरीर नहीं, एक ही चेतना के विस्तार हैं तुम मेरी साधना हो और मैं तुम्हारी आस्था। इसी निष्कपट प्रेम में जीवन की हर कठिनाई सहज हो जाती है, और हर पथ आलोकित।

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डॉ. सविता सिंह को मिला ‘हिंदी साहित्य सेवी सम्मान’

, हिंदी दिवस के अवसर पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना द्वारा आयोजित विशेष समारोह में जमशेदपुर की सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सविता सिंह ‘मीरा’ को “हिंदी साहित्य सेवी सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ द्वारा प्रदान किया गया।

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हिंदी को ही राष्ट्रभाषा होनी चाहिए

जब 1947 में देश को आज़ादी मिली, तब भाषा की बड़ी चिंता खड़ी हुई। हमारा भारत एक विशाल देश है, जहाँ विविध संस्कृतियाँ हैं, सैकड़ों भाषाएँ बोली जाती हैं, और हज़ारों बोलियाँ भी हैं। हर राज्य की अनेक मातृभाषाएँ हैं। ऐसे विशाल देश को आज़ादी के बाद निवास करने वाले असंख्य भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों को एक साथ मिलाने का प्रयास भारत की नवनिर्माण सरकार कर रही थी। जबकि हमारे देश के पास स्वयं की कोई राष्ट्रीय भाषा ही नहीं थी।

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मान वाणी हिंदी

“हिंदी अब केवल देश तक सीमित नहीं रही, विदेशों में भी उसका मान बढ़ा है। लोग हिंदी सुनते, समझते और अभिवादन में भी अपनाते हैं। फिर भी हमारे ही शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि विकास अंग्रेज़ी से होगा, जबकि हिंदी बोलने पर मानो कोई अपराध कर दिया गया हो। यही हमारी सबसे बड़ी त्रासदी है।”

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