निर्लिप्त एकांत
‘निर्लिप्त एकांत’ उस मन की कविता है जो किसी की स्मृति का बोझ नहीं बनना चाहता. एक खिड़की, जल पर चाँद का क्षणिक प्रतिबिंब और एक रिक्त स्थान के रूपक के माध्यम से कविता अदृश्य हो जाने की गहरी इच्छा को व्यक्त करती है.

‘निर्लिप्त एकांत’ उस मन की कविता है जो किसी की स्मृति का बोझ नहीं बनना चाहता. एक खिड़की, जल पर चाँद का क्षणिक प्रतिबिंब और एक रिक्त स्थान के रूपक के माध्यम से कविता अदृश्य हो जाने की गहरी इच्छा को व्यक्त करती है.
कुछ लोग नज़रों से दूर हो जाते हैं, मगर दिल से नहीं। यह कविता उसी विरह, स्मृति और लौट आने की उम्मीद का गीत है, जहाँ प्रेम जुदाई के बाद भी सांस लेता रहता है।
कुछ प्रश्न जीवन में हमेशा अनुत्तरित रह जाते हैं। “मन का कोरा पन्ना” प्रेम, पीड़ा, विवशता और अनकहे एहसासों की ऐसी ही संवेदनशील यात्रा है, जहाँ शब्दों से अधिक खामोशी बोलती है।