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सर्द रात में चादर में दुबकी अकेली नवविवाहिता और खिड़की पर बैठी चिड़िया

चिड़िया

22 वर्ष की एक नवविवाहिता, दूर-दराज़ के सरकारी अस्पताल में तैनात पति और एक सुनसान सरकारी मकान। पति के दौरे पर चले जाने के बाद अकेलेपन से जूझती उस स्त्री की दुनिया माँ की यादों और किताबों के सहारे चलती है। एक सर्द रात खिड़की के बाहर चिड़िया की आवाज़ उसके भीतर दबे अतीत का ऐसा दरवाज़ा खोल देती है, जहाँ माँ का आँचल, अब्बा का दुलार और बचपन की सुरक्षित दुनिया फिर जीवित हो उठती है।

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निर्लिप्त एकांत हिंदी कविता के लिए पुराने घर की खिड़की और जल पर चाँद के प्रतिबिंब का भावपूर्ण दृश्य

निर्लिप्त एकांत

‘निर्लिप्त एकांत’ उस मन की कविता है जो किसी की स्मृति का बोझ नहीं बनना चाहता. एक खिड़की, जल पर चाँद का क्षणिक प्रतिबिंब और एक रिक्त स्थान के रूपक के माध्यम से कविता अदृश्य हो जाने की गहरी इच्छा को व्यक्त करती है.

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अलमारी में टंगे रंग-बिरंगे लेहंगे को देखती एक भारतीय महिला, शादी और पारिवारिक यादों में खोई हुई, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य।

रिश्ते

खुश्बू गोयल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) वो लेहंगा, जो भैया की शादी में लिया था,उसकी भी बड़ी अजीब कहानी है। जब भी अलमारी खोलूँ,माँ को बस वही नज़र आता है,और हर बार की तरहउनका कहना शुरू हो जाता है “इतना भारी लेहंगा क्यों लिया था,जब तुझे पहनना ही नहीं था?” बस एक बार भैया की शादी…

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विरह में डूबी एक स्त्री, दूर जाती परछाईं को निहारती हुई, आँखों में प्रेम और प्रतीक्षा का गहरा भाव।

नज़र से जुदा

कुछ लोग नज़रों से दूर हो जाते हैं, मगर दिल से नहीं। यह कविता उसी विरह, स्मृति और लौट आने की उम्मीद का गीत है, जहाँ प्रेम जुदाई के बाद भी सांस लेता रहता है।

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मंद मुस्कान के साथ खड़ी एक युवती, जिसकी आँखों में बचपन और प्रेम की मासूम यादें झलक रही हैं।

लम्हा

कुछ रिश्ते उम्र नहीं, एहसास जीते हैं। “लम्हा” कविता सोलह-सत्रह की मासूमियत, बचपन की खुशबू और प्रेम की कोमल मुस्कुराहटों को बेहद संवेदनशीलता से उकेरती है।

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रात की खामोशी में डायरी के सामने बैठी एक भावुक स्त्री, अधूरी मोहब्बत और अनकहे सवालों में डूबी हुई।

मन का कोरा पन्ना

कुछ प्रश्न जीवन में हमेशा अनुत्तरित रह जाते हैं। “मन का कोरा पन्ना” प्रेम, पीड़ा, विवशता और अनकहे एहसासों की ऐसी ही संवेदनशील यात्रा है, जहाँ शब्दों से अधिक खामोशी बोलती है।

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