लाल टेशू के फूलों से लदे पेड़ की डाल पर बैठी एक अकेली स्त्री की परछाईं, पृष्ठभूमि में धुंधला बियाबान जंगल

उसने चाहा प्रेम…

यह कविता स्त्री की उन अधूरी इच्छाओं की कहानी कहती है जिन्हें समाज ने अपराध, पाप या विद्रोह घोषित कर दिया। प्रेम, सौंदर्य, आध्यात्म और स्वतंत्रता की चाह रखने वाली स्त्री हर मोड़ पर दंडित होती रही लेकिन अंततः वह अपनी ही आग में एक नई सत्ता बनकर उभरती है।

Read More

शब्दों का आचरण

यह लघुकथा ज्ञान और आचरण के अंतर को उजागर करती है। जो ऋषि संसार को करुणा का उपदेश देता है, वही अपने घर में उसे जी नहीं पाता। अंततः शब्दों की खोखली चमक टूटती है और सच्चे आत्मबोध का जन्म होता है पर एक अपूरणीय क्षति के साथ।

Read More