Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
समाज की संवेदनहीनता पर आधारित हिंदी कविता, जिसमें गंदगी, सफाई कर्मी की पीड़ा, पुल हादसा, अस्पताल लापरवाही और शिक्षा के व्यवसायीकरण को दर्शाया गया है

छोड़ो ना अपना क्या जाता है… 

हर बार जब समाज की किसी समस्या पर हम चुप रह जाते हैं और सोचते हैं“अपना क्या जाता है”, तब इंसानियत थोड़ा और मर जाती है। यह कविता उसी संवेदनहीन सोच पर तीखा प्रहार करती है।

Read More