अब अहिल्या को राम नहीं मिलते…
पुलिस की रेड पड़ी और इस बार वह पकड़ी गई। थाने में महिला पुलिस फटकार लगा रही थी—”शर्म नहीं आती तुम्हें शरीर बेचते हुए? तुम औरत के नाम पर कलंक हो!” वह सिर नीचा किए सुनती रही। सुन-सुनकर पत्थर हो गई। यह लताड़ पहली बार नहीं पड़ी थी, न जाने कितनी बार लोगों ने उसकी औक़ात उसे दिखाई है। वह यह भी जानती है कि दिन में औक़ात दिखाने वाले, रात में उसके दरवाज़े पर खड़े रहते हैं।
