पन्नों से परवाज़ तक
लालटेन की रोशनी में शुरू हुआ पढ़ाई का सफर मुंबई की चॉल की छोटी-सी खिड़की तक पहुँचा. जिम्मेदारियों के बीच भी उजाला ने सीखना नहीं छोड़ा और अपने सपनों को हकीकत में बदलकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई.

लालटेन की रोशनी में शुरू हुआ पढ़ाई का सफर मुंबई की चॉल की छोटी-सी खिड़की तक पहुँचा. जिम्मेदारियों के बीच भी उजाला ने सीखना नहीं छोड़ा और अपने सपनों को हकीकत में बदलकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई.
यह प्रेरक कहानी योगेंद्र पोरवाल की है, जिन्होंने मात्र 16 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद जिम्मेदारियाँ संभालीं और छोटी सी दुकान से सफर शुरू किया। समय के साथ बदलाव अपनाते हुए उन्होंने संघर्ष, मेहनत और दूरदर्शिता से 30 वर्षों में सफलता की मजबूत पहचान बनाई।
गुरुकुल मानस एकेडमी की छात्रा अंशिका मालवीय ने 12वीं में 89.6% अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी यह सफलता मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है, जो अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।
सिद्धार्थ पारधे का जीवन हमें सिखाता है कि अगर इरादे मजबूत हों और सही मार्गदर्शन मिले, तो इंसान फुटपाथ से उठकर महलों तक का सफर तय कर सकता है। उनकी विनम्रता, और जमीन से जुड़े रहने की भावना उन्हें बाकी सफल व्यक्तियों से अलग बनाती हैं। उनकी कहानी कंक्रीट के जंगल में संवेदनाओं की जीत की कहानी है।