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वृद्ध माता-पिता की सूनी आँखें अपने बच्चों की राह निहारते हुए – माता-पिता की उपेक्षा और अकेलेपन पर भावपूर्ण हिंदी कविता।

सूनी आँखें

सूनी आँखें” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो वृद्ध माता-पिता के अकेलेपन, उपेक्षा और उनके मन में अपने बच्चों के प्रति अटूट प्रेम को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म और सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है

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वृद्धाश्रम के कमरे में खिड़की के पास बैठी एक वृद्ध माँ, आँखों में आँसू और हाथों में परिवार की पुरानी तस्वीर, बाहर दीपावली की रोशनी और भीतर गहरा अकेलापन।

टूट जाती हूँ जब…

वृद्धाश्रम में रह रही एक माँ के मन की पीड़ा, बच्चों के प्रति अटूट प्रेम और उपेक्षा के दर्द को अभिव्यक्त करती यह मार्मिक कविता पाठकों को रिश्तों, संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं पर गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करती है।

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अकेली वृद्ध माँ बैठी हुई, आँखों में आँसू और मन में पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा का प्रतीक

क्यों वृद्धाश्रम में जाऊँ

यह कविता उस माँ की पीड़ा को स्वर देती है, जिसने जीवन भर अपनी संतान को सींचा, सँवारा और बड़ा किया, लेकिन अंत में उसी से वृद्धाश्रम जाने का आदेश मिला। यह रचना समाज से एक करुण सवाल पूछती है क्या माँ का अब कोई ठौर नहीं?

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वृद्धाश्रम में खिड़की के पास बैठी एक बुजुर्ग भारतीय माँ, हाथ में बेटे की फोटो, आंखों में इंतज़ार और दर्द

मस्‍त हवा का इक झौंका

यह कविता मां और बच्चों के प्रेम और यादों की भावनाओं को उजागर करती है। जीवन में अलगाव, पालन-पोषण और अंततः मातृत्व के अद्भुत बंधन को दर्शाती यह कविता भावनात्मक और मार्मिक है। प्रत्येक पंक्ति में माँ और बच्चे के बीच के गहरे प्यार और यादों का सौंदर्य दिखाई देता है।

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