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“प्रजातंत्र का प्रतीक वन दृश्य”

एक कविता लिखूँगी…

यह कविता जंगल के रूपक के माध्यम से प्रजातंत्र और सत्ता परिवर्तन की गहरी सामाजिक व्याख्या प्रस्तुत करती है। इसमें हिंसक और शक्तिशाली जीवों के स्थान पर शांतिप्रिय और संवेदनशील जीवों को सत्ता सौंपने की कल्पना की गई है। यह केवल एक काल्पनिक बदलाव नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संतुलन की आवश्यकता को दर्शाता है। कविता यह संदेश देती है कि जब भय और शोषण पर आधारित व्यवस्था समाप्त होती है, तब ही वास्तविक प्रजातंत्र स्थापित हो सकता है।

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