चटख पीली साड़ी
अंडमान के राधानगर बीच पर समुद्र, बिकिनी और चटख पीली साड़ी के बीच लेखिका के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे अनुभव को एक मज़ेदार याद में बदल दिया.

अंडमान के राधानगर बीच पर समुद्र, बिकिनी और चटख पीली साड़ी के बीच लेखिका के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे अनुभव को एक मज़ेदार याद में बदल दिया.
स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान दक्षिण भारत की 21 दिनों की यात्रा लेखक के लिए केवल भ्रमण नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और मानवीय व्यवहार को समझने का गहन अनुभव बनी। बंगलौर में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक अनजान व्यक्ति की निस्वार्थ मदद और लालबाग की शांति इस यात्रा को जीवनभर स्मरणीय बना गई।
यह एक माँ की हिम्मत, आत्मविश्वास और अनुभवों की कहानी है — जो अपने दो बच्चों के साथ अकेले कश्मीर की वादियों में निकल पड़ी। पुलवामा की घटना के बाद जब डर और संदेह ने मन को जकड़ रखा था, तब भी उसने फैसला किया कि ज़िंदगी के इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देगी। डर के उस पार फैली थी बर्फ़ से ढकी पहाड़ों की शांति, मेहमाननवाज़ लोगों का अपनापन और एक माँ के दिल में दर्ज़ हो गई यादों की चमक।