रफ़्ता-रफ़्ता तुम दिल में उतर गए
एक साधारण हाय-हैलो से शुरू हुई बातचीत कैसे धीरे-धीरे गहरी दोस्ती और फिर मोहब्बत में बदल गई. रिधिमा और एक लड़के की संवेदनशील, भावुक और आत्मिक प्रेम कहानी पढ़िए.

एक साधारण हाय-हैलो से शुरू हुई बातचीत कैसे धीरे-धीरे गहरी दोस्ती और फिर मोहब्बत में बदल गई. रिधिमा और एक लड़के की संवेदनशील, भावुक और आत्मिक प्रेम कहानी पढ़िए.
मोहब्बत अजीब है…जिन्हें हमारी कद्र नहीं, हम वहीं अपनी रूह रख आते हैं।हम उनके लिए हर लम्हा ख़यालों में सुलगते रहते हैं,और वो हमारी बे-ख़ुदी की ख़बर तक नहीं लेते। शिकायत भी नहीं कर सकते…क्योंकि इश्क़ में इख़्तियार हमारा होता ही कहाँ है।
कभी-कभी ज़बान से निकले जुमले इतने तेज़ और धारदार होते हैं जैसे कमान से छूटा हुआ तीर।
जिसका ज़िक्र दिल की धड़कनों में रच-बस जाए, उसे भला जान से कैसे जुदा किया जा सकता है?
पर सच यह है कि कुछ बातों में दम नहीं होता।
लोग अपने ही बयान से हल्के और खोखले साबित हो जाते हैं। कभी ऐसा भी हुआ कि किसी ने मुझे देख लिया और छिप गया, जैसे मैं ही उसके सामने आईना हूँ। उस पल महसूस हुआ कि मकान से बाहर निकलते ही इंसान अपने असली रूप में आ जाता है।