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विवाह के प्रतीकात्मक वातावरण में एक भारतीय माँ अपनी बेटी का हाथ थामे खड़ी है, जो आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्र पहचान का संदेश देती है।

मेरी बेटियों

“मेरी बेटियों” केवल विवाह पर लिखी कविता नहीं, बल्कि बेटियों के आत्मसम्मान, स्वतंत्र पहचान और रिश्तों में गरिमा की बात करने वाली संवेदनशील अभिव्यक्ति है। यह कविता कन्यादान, सामाजिक अपेक्षाओं और समझौते की सीमाओं पर प्रश्न उठाते हुए बेटियों को यह संदेश देती है कि किसी भी रिश्ते से पहले उनका जीवन और सम्मान महत्वपूर्ण है।

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