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मन की आवाज़ और मुसाफ़िर दिल…

दूरी, अनिश्चितता और आत्मसंघर्ष से भरे इन भावों में एक अकेली रूह की पुकार है – जो कभी अपने प्रिय को पुकारती है, कभी जीवन की राहों से सवाल करती है, तो कभी अंधेरों में खुद को एक जुगनू की तरह जलता हुआ महसूस करती है। ये पंक्तियाँ उस मन की आवाज़ हैं जो भटकते हुए भी उम्मीद नहीं छोड़ता।

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