gulmohar

भ्रम : एक म्यान दो तलवारें

राम “और ” श्याम ” नाम रखूंगी भाभीजी – मेरे भी आंगन में किलकारी गूंजेगी , मेरी गोद से नहीं तो क्या हुआ ! छोटी की गोद से सही ।
बस, पांडे जी को खुश देखना चाहती हूं ।
अपने ही पति की सेज सजाई पंडिताइन ने – घर में किलकारी भी गूंजी …….
लेकिन अपने हाथों अपनी बगिया …

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सुर संगम साथ मिले

कविता मानवीय हृदय की उन गहरी इच्छाओं को प्रकट करती है जो भौतिक सुख-संपदा से परे, आत्मिक शांति और सच्चे प्रेम की खोज में हैं। कवि ने “प्रारम्भी नेह” में जीवन को एक ऐसे वन के रूप में देखा है जहाँ वह चंदन जैसी सुगंध और गुलशन जैसी सुंदरता चाहता है, परंतु उसे एहसास है कि धन और वैभव उसके साथ नहीं रहेंगे। इसलिए वह जीवन में सुर-संगम अर्थात् आत्मिक सामंजस्य की चाह रखता है।

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