महिला दिवस
स्त्री : परम्परा और प्रगति की देहरी पर
मुंबई में ‘स्त्री : परम्परा और प्रगति की देहरी पर’ विषय पर आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में स्त्री जीवन के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श किया गया। ‘बतरस : एक अनौपचारिक उपक्रम’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विभा रानी ने स्त्री-पुरुष असमानता, सामाजिक रूढ़ियों और आधुनिक चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
हँसी, होली और नारी सम्मान का अनोखा संगम
महिला दिवस के अवसर पर आयोजित “रंग-रस और हास्य की फुहार” कार्यक्रम में हास्य कवि सम्मेलन, साहित्यिक प्रस्तुतियां और नारी शक्ति सम्मान समारोह ने दर्शकों को खूब आनंदित किया।
जब विचारों से पहचान बनने लगे
यह प्रेरक महिला दिवस कविता बताती है कि असली सशक्तिकरण बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि विचारों, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता में है। जब स्त्री अपनी पहचान खुद तय करने लगे और जीवन को संभावनाओं के विस्तार की तरह जीने लगे, तभी महिला दिवस सार्थक होता है।
