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जो खुद को नहीं जाना, उसने कुछ नहीं जाना!

विद्या का वास्तविक अर्थ केवल तकनीकी ज्ञान या भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह सबसे पहले स्वयं को जानने, समझने और जीवन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को खोजने की प्रक्रिया है। यदि हम स्वयं को और समस्त प्राणी जगत को एक ईश्वर की रचना मानकर देखें तो जीवन की अधिकांश उलझनें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। विद्या वही है जो हमें भीतर से शुद्ध बनाए, आत्मा को जानने का अवसर दे और बाहरी दिखावे के मोह से दूर रखे।

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