फ्रेंडशिप डे पर सहेलियों की भावनात्मक तस्वीर

मेरा सच्चा दोस्त

जीवन में कुछ दोस्त ऐसे होते हैं, जो हर रिश्ते से बढ़कर बन जाते हैं। बचपन की सहेली, परिवार जैसी मित्र और कठिन समय में बिना कहे साथ खड़ी रहने वाली दोस्त—यही सच्ची दोस्ती की पहचान है। यह भावनात्मक संस्मरण तीन ऐसी सहेलियों की कहानी है, जिन्होंने हर सुख-दुख में साथ निभाकर दोस्ती को जीवन का सबसे अनमोल रिश्ता बना दिया। यह लेख बताता है कि सच्चे दोस्त केवल खुशियों के साथी नहीं होते, बल्कि मुश्किल समय में हमारी सबसे बड़ी ताकत भी बनते हैं।

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माँ के अस्पताल के बिस्तर के पास बैठी एक चिंतित बेटी, हाथ में किताब लिए हुए, त्याग और जिम्मेदारी का भावनात्मक दृश्य।

रोल नंबर 4740

एक बेटी, जिसने UPSC के सुनहरे सपनों से अधिक अपनी माँ की सेवा को महत्व दिया। पिता के निधन, आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों के बीच संघर्ष, त्याग और जिम्मेदारी की यह कहानी हर पाठक के हृदय को छू जाती है।

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विदा के उस मोड़ पर खड़ी यादें

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद बादलों के पार एक जहान और भी है,यादों के दरमियान जो नहीं है, वह भी है.31 दिसंबर 2022 नानी नहीं रही यह मैसेज देखते ही हाथ-पाँव सुन्न हो गए. आँखों में आँसू आए और जम गए. होंठ फड़फड़ाए और खामोश हो गए. हालाँकि जानती थी, समझ भी रही थी, फिर…

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अख़बार पढ़ने के चक्कर में

अख़बार बाँधते हुए उस दिन एक खबर ने मुझे रोक लिया।
वह सिर्फ़ एक फिल्मी समाचार नहीं था,
वह एक पूरे देश की धड़कन बन गया था।उस सुबह के बाद मैं अख़बार में पहले पन्ने नहीं,पहले अमिताभ बच्चन को खोजता था. क्योंकि कुछ नाम खबर नहीं होते,
याद बन जाते हैं।

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