विदा के उस मोड़ पर खड़ी यादें

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद बादलों के पार एक जहान और भी है,यादों के दरमियान जो नहीं है, वह भी है.31 दिसंबर 2022 नानी नहीं रही यह मैसेज देखते ही हाथ-पाँव सुन्न हो गए. आँखों में आँसू आए और जम गए. होंठ फड़फड़ाए और खामोश हो गए. हालाँकि जानती थी, समझ भी रही थी, फिर…

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अख़बार पढ़ने के चक्कर में

अख़बार बाँधते हुए उस दिन एक खबर ने मुझे रोक लिया।
वह सिर्फ़ एक फिल्मी समाचार नहीं था,
वह एक पूरे देश की धड़कन बन गया था।उस सुबह के बाद मैं अख़बार में पहले पन्ने नहीं,पहले अमिताभ बच्चन को खोजता था. क्योंकि कुछ नाम खबर नहीं होते,
याद बन जाते हैं।

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