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मुझे ज़िंदगी में तिजारत करना नहीं आया

जिसे जीवन में तिजारत नहीं, इंसान बने रहना सिखाया गया। पिता की सुरक्षा-केंद्रित सोच, मेले की छोटी-सी नौकरी और पहला व्यापारिक असफल अनुभव सब मिलकर यह बताते हैं कि हर हार नुकसान नहीं होती, कुछ हारें मनुष्यता बचा लेती हैं।

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खुद से खुद की जंग

तुम्हारे जाने के बाद ज़िंदगी अचानक खाली हो गई थी। जो आदतें कभी सुकून देती थीं, वही अब चुभने लगीं। तब समझ आया कि सहारे पर जीना आसान होता है, पर खुद खड़े होना सीखना ज़रूरी। उसी खालीपन में मैंने खुद को पहचाना और धीरे-धीरे अपनी ही ज़िंदगी की लड़ाई लड़ना सीख लिया।

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