यादों की गलियों में लौट चलें
माँ के हाथों का स्वाद केवल भोजन का स्वाद नहीं, बल्कि ममता, त्याग और निस्वार्थ प्रेम की ऐसी विरासत है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे साथ चलती है।

माँ के हाथों का स्वाद केवल भोजन का स्वाद नहीं, बल्कि ममता, त्याग और निस्वार्थ प्रेम की ऐसी विरासत है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे साथ चलती है।
जिसे जीवन में तिजारत नहीं, इंसान बने रहना सिखाया गया। पिता की सुरक्षा-केंद्रित सोच, मेले की छोटी-सी नौकरी और पहला व्यापारिक असफल अनुभव सब मिलकर यह बताते हैं कि हर हार नुकसान नहीं होती, कुछ हारें मनुष्यता बचा लेती हैं।
अख़बार बाँधते हुए उस दिन एक खबर ने मुझे रोक लिया।
वह सिर्फ़ एक फिल्मी समाचार नहीं था,
वह एक पूरे देश की धड़कन बन गया था।उस सुबह के बाद मैं अख़बार में पहले पन्ने नहीं,पहले अमिताभ बच्चन को खोजता था. क्योंकि कुछ नाम खबर नहीं होते,
याद बन जाते हैं।