Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
घोंसले से पहली बार उड़ान भरते गौरैया के बच्चे, पास में उनके माता-पिता और खिड़की से आती सुनहरी सुबह की रोशनी।

खाली घोंसला, भरा हुआ मन

घर के एक छोटे से कोने में बसे गौरैया के घोंसले ने जीवन का ऐसा पाठ सिखाया, जिसे शायद बड़ी-बड़ी किताबें भी नहीं सिखा पातीं। नन्हे पंखों की पहली उड़ान, माता-पिता का निस्वार्थ प्रेम और फिर सही समय आने पर उन्हें खुले आसमान के हवाले कर देना— यही प्रकृति का सबसे सुंदर संदेश है। गौरैया के बच्चों की विदाई ने यह एहसास कराया कि सच्चा प्रेम किसी को बाँधता नहीं, बल्कि उसे इतना सक्षम बनाता है कि वह आत्मविश्वास के साथ अपनी राह चुन सके।

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नव अंकुर की आस

नवपल्लवित पौधा अपनी कोमल जड़ों से धरती का आशीर्वाद लेकर जीवन की नई शुरुआत करता है। वह नव अंबर और नव भोर के साक्षी के रूप में जन्म लेता है, अपने भीतर जीवन की नयी आस संजोए हुए। चारों ओर फैले उपवन की मधुर सुवास उसे उल्लास से भर देती है। वह अभी शिशु है, पर हर दिन वायु और जल का स्पर्श पाकर बढ़ने की आकांक्षा रखता है।

वह जानता है कि एक दिन वह विशाल वृक्ष बनेगा—जिसकी छाया में संसार विश्राम करेगा, जो अनगिनत जीवों को ऑक्सीजन और जीवनदान देगा। उसका अस्तित्व निःस्वार्थ है, उसका हर अंश किसी न किसी के काम आने वाला है

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