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“बाजोट कहानी संग्रह की थीम दर्शाता भारतीय पारिवारिक और सामाजिक दृश्य”

“बाजोट”: रिश्तों के आईने में झांकता सच

“बाजोट” कहानी संग्रह आधुनिक भारतीय समाज, रिश्तों की जटिलताओं और मनुष्य के आंतरिक द्वंद्व का सजीव चित्रण है। यह समीक्षा पुस्तक की हर कहानी के गहरे अर्थ और सामाजिक संदर्भ को उजागर करती है।

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किताब “स्मृति नाद” के साथ बैठा व्यक्ति, यादों और भावनाओं में खोया हुआ

आत्मा को स्पर्श करती “स्मृति नाद”

“स्मृति नाद” अपूर्वा की ऐसी काव्य कृति है, जो स्मृतियों, रिश्तों और भावनाओं के गहरे संसार को सजीव करती है। इसमें मां, पिता और बचपन से जुड़ी अनुभूतियां इतनी सजीव हैं कि पाठक केवल पढ़ता नहीं, बल्कि उन्हें जीने लगता है।

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शब्दों में संवेदना का दरवाज़ा :”मुझ में भी रहता है इकतारा”

डॉ. तारा गुप्ता द्वारा लिखित गज़ल संग्रह मुझ में भी रहता है इकतारा दिल और दिमाग के बीच बहते उस पुल की तरह है, जिस पर चलते हुए पाठक जीवन, संवेदना, अनुभव और दर्शन सभी को साथ लेकर आगे बढ़ता है. कुल 70 ग़ज़लें, 36 मुक्तक और 35 दोहे इस संग्रह को विविधता से भरते हैं और पाठक को एकरसता से दूर रखते हैं.

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