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नानी के घर की छुट्टियां—बचपन की सबसे खूबसूरत यादें

वो जो छुट्टियां थीं

“वो जो छुट्टियां थीं” एक भावनात्मक और नॉस्टेल्जिक लेख है, जो हमें सीधे बचपन की उन सुनहरी यादों में ले जाता है, जहाँ नानी का घर हर खुशी का केंद्र हुआ करता था। यह रचना केवल छुट्टियों का वर्णन नहीं, बल्कि उस दौर की सादगी, अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।

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कुएँ में गिरने का रोमांचक अनुभव, 4 साल की मासूम बालिका चमत्कारिक रूप से बची

कुएँ में गिरना

भागलपुर में बचपन की एक दिल दहला देने वाली घटना, जब 4 साल की बच्ची खेल-खेल में कुएँ में गिर गई, लेकिन भगवान की कृपा से सुरक्षित बाहर निकाल ली गई. पढ़ें पूरा संस्मरण.

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विदा के उस मोड़ पर खड़ी यादें

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद बादलों के पार एक जहान और भी है,यादों के दरमियान जो नहीं है, वह भी है.31 दिसंबर 2022 नानी नहीं रही यह मैसेज देखते ही हाथ-पाँव सुन्न हो गए. आँखों में आँसू आए और जम गए. होंठ फड़फड़ाए और खामोश हो गए. हालाँकि जानती थी, समझ भी रही थी, फिर…

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