दीदार
कभी एक नज़र का दीदार पूरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी बन जाता है, तो कभी वही दीदार उम्रभर का इंतज़ार छोड़ जाता है। यह कविता मोहब्बत, बिछड़न, ख़ामोशी और अनकहे जज़्बातों की ऐसी दास्तान है, जहाँ हर शेर दिल की धड़कनों से निकलकर सीधे रूह तक पहुँचता है। प्रेम के दर्द और दीदार की तड़प को महसूस कराती यह रचना हर प्रेमी के मन की आवाज़ बन जाती है।
