मैंने हर रोज़ ज़माने को रंग बदलते देखा है
उम्र के साथ बदलती जिंदगी, ढलती जवानी, कमजोर पड़ती ताकत और वक्त के बदलते रंगों की सच्चाई को बयां करती यह भावपूर्ण कविता इंसान को अपने आज पर घमंड न करने और दूसरों को खुश रखने का संदेश देती है.

उम्र के साथ बदलती जिंदगी, ढलती जवानी, कमजोर पड़ती ताकत और वक्त के बदलते रंगों की सच्चाई को बयां करती यह भावपूर्ण कविता इंसान को अपने आज पर घमंड न करने और दूसरों को खुश रखने का संदेश देती है.
हार और जीत, सुख और दुख, प्रेम और घृणा—जिंदगी इन सभी भावों का संगम है। यह कविता जीवन के इसी सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है और हमें सिखाती है कि कर्म, सरलता और परमार्थ के मार्ग पर चलकर ही जीवन के पलों को सार्थक बनाया जा सकता है।