महिदपुर रोड ने खोई अपनी ‘विमला भाभी’

महिदपुर रोड के पुराने पीपल के पास रहने वाली मशहूर पारंपरिक दाई ‘ विमला भाभी’ का निधन हो गया. विमला भाभी स्वर्गीय मांगीलाल जी चौहान की धर्मपत्नी, कैलाशचंद्र चौहान, स्व.रमेशचंद्र चौहान की भाभीजी तथा लोकेंद्र, नरेंद्र, स्वर्गीय मनोज की माताजी तथा अंकित की दादी जी विमला बाई चौहान का निधन शनिवार शाम को हो गया.

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छोड़ आये अपना वो गांँव…

“छोड़ आये अपना वो गाँव” में कवि अपने बचपन और गाँव की यादों को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त करते हैं। यह कविता गाँव की सरल, प्राकृतिक और आत्मीय जीवन शैली के सुंदर चित्रण से भरी है—बैलगाड़ियाँ, खेतों की हरियाली, पनिहारन की पायल की झनकार, बुजुर्गों की चौपाल और सुबह की ग्रामीण रौनक। शहर की चमक-धमक, गगनचुंबी इमारतें और व्यस्त जीवन के बीच कवि को गाँव की मिट्टी, पेड़ों की छांव और अपनापन याद आता है। कविता यह दर्शाती है कि चाहे जीवन कितनी भी व्यस्त या आधुनिक क्यों न हो, अपने गाँव और सरल जीवन की याद हमेशा हृदय में बनी रहती है, और व्यक्ति को फिर से लौटने की लालसा जगाती है।

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