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अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लौटता हुआ जनसमूह, तनी हुई मुट्ठियाँ और संघर्ष का प्रतीकात्मक दृश्य।

वे लौटेंगे..

“वे लौटेंगे” एक प्रभावशाली कविता है जो बिखरे हुए लोगों के फिर से संगठित होकर अन्याय के खिलाफ खड़े होने की उम्मीद को स्वर देती है। यह रचना संघर्ष, एकता और मानवता के बीज बोने की बात करती है। कविता बताती है कि जो लोग दिशाओं में बिखर गए हैं, वे एक दिन फिर लौटेंगे भूख, पीड़ा और अन्याय को मुट्ठी में भींचकर, एक स्वर और एक आवाज़ बनकर।

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