Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
कमरे में अकेली व्यक्ति खिड़की के पास बैठा, धुंधली रोशनी में खुद को देखता हुआ, मन में उदासी और अकेलेपन का भाव। कमरे में शांत वातावरण, हल्की धुंध और बांसुरी की कल्पित धुन महसूस होती है।

एकांत की तलाश

आज मन उदास है। रोशनी चुभती है, सितारे दिखना भी नहीं चाहते। वह अकेलेपन में बांसुरी की धुन में शांत होना चाहता है, जहाँ कोई सुनने वाला नहीं और सिर्फ यादें साथ हों।

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बिना आत्मा के शरीर बेजान

मनुष्य पूरे जीवन उस चीज़ के पीछे भागता रहता है जिसे वह मृत्यु के बाद साथ ले ही नहीं जा सकता। न शरीर उसके साथ जाता है और न ही शौहरत साथ जाता है तो केवल कर्म, जिसकी ओर वह सबसे कम ध्यान देता है। आज अधिकांश लोग अपने सुख के लिए दूसरों के अरमान कुचलने में भी हिचकते नहीं, यही विकर्म उन्हें भीतर से अशांत कर देता है। सच यह है कि बिना आत्मा के शरीर सिर्फ एक बेजान ढांचा है, और बिना शरीर के आत्मा कर्म नहीं कर सकती। शव तभी शव कहलाता है जब आत्मा देह से विदा हो चुकी हो।

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