खिड़की के पास बैठा एक व्यक्ति, डूबती शाम की रोशनी में जिंदगी की किताब के साथ भावनात्मक चिंतन करता हुआ दृश्य

राज़-ए-ज़िंदगी

यह ग़ज़ल ज़िंदगी के रहस्यों, प्रेम और अस्तित्व के गहरे एहसासों को बयां करती है। कवि ने “किताब-ए-ज़िंदगी” के रूपक के माध्यम से जीवन के अनसुलझे प्रश्नों और भावनाओं को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। हर शेर जीवन के एक नए पहलू को उजागर करता है।

Read More