शब्दों की साधना, शिव की आराधना
साहित्यिक सम्मान, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन तथा इंदौर की सांस्कृतिक समृद्धि से सजी यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार आध्यात्मिक और साहित्यिक उपलब्धियों में से एक बन गई।

साहित्यिक सम्मान, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन तथा इंदौर की सांस्कृतिक समृद्धि से सजी यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार आध्यात्मिक और साहित्यिक उपलब्धियों में से एक बन गई।
कोटा रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ना शुरू हो गया है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर काम जारी होने के चलते रतलाम मंडल से संचालित इंदौर-कोटा एक्सप्रेस अब 4 मई तक कोटा स्टेशन तक नहीं पहुंचेगी। यह ट्रेन सोगरिया स्टेशन तक ही जाकर वहीं से वापस लौटेगी।
साल 1980 का महिदपुर रोड, गलियों में हलचल थी और हर कोई पहले बड़े जलसे “चटर्जी नाइट” की तैयारियों में व्यस्त। यह जलसा प्रिय शिक्षक स्व. कपूर साहब की स्मृति में आयोजित किया गया था। मंच की कमी के बावजूद विद्यार्थियों ने खाली ड्रम और लकड़ी के स्लीपर से एक शानदार मंच तैयार किया। जब प्रभात चटर्जी और उनका आर्केस्ट्रा मंच पर आए, तालियों और उत्साह की गूँज में पूरा महिदपुर रोड मंत्रमुग्ध हो गया। यह केवल संगीत का आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और जुनून की मिसाल बन गया।
बयालीस साल बाद हुई यह मुलाकात सिर्फ दो पुराने साथियों के मिलने भर की नहीं थी, बल्कि उन दिनों की धड़कनों को फिर से जी लेने जैसा अनुभव थी। इंदौर की गलियों में साइकिल से खबरों की तलाश में दौड़ते हुए बिताए गए वे दिन यादों की परतों से झाँकने लगे — अनंत चतुर्दशी की रातें, दंगों के बीच रिपोर्टिंग की बेचैनी, और श्मशानघाटों से जुटाई गई खबरों की जिम्मेदारी।
रतलाम के घर में बैठे हुए, चाय की प्यालियों के बीच समय जैसे ठहर गया था। हम दोनों बीच-बीच में ठहाके लगाते, कभी पुराने नामों को याद करते और कभी आज की पत्रकारिता पर अफसोस जताते। प्रदीप जब अपनी खबरों के डिजिटलाईजेशन की बात कर रहे थे, तो मन में एक अजीब कसक उठी — कुछ चीज़ें वक्त के साथ सँभाल लेनी चाहिए थीं।
महिला जागृति अभियान की पाँचवीं वर्षगांठ के अवसर पर इंदौर में आयोजित एक भव्य समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार अरुणा खरगोनकर द्वारा संपादित विधवाओं की दशा पर केंद्रित स्मारिका का लोकार्पण किया गया. आयोजन विचार प्रवाह साहित्य मंच के तत्वावधान में इंदौर प्रेस क्लब स्थित एक रेस्तरां के सभागार में हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में महिलाएँ उपस्थित थीं.कार्यक्रम का शुभारंभ महाराष्ट्र में विधवा प्रथा उन्मूलन आंदोलन के जनक प्रमोद झिंझड़े, वरिष्ठ पत्रकार व समाजकर्मी प्रसून लतांत, इंदौर प्रेस क्लब के मुकेश तिवारी, विचार प्रवाह साहित्य मंच की अध्यक्ष सुषमा दुबे और समाज चिंतक मनीष खरगोनकर ने संयुक्त रूप से किया.
गरिमामय एवं आत्मीय समारोह में 4 दशक से मैदानी पत्रकारिता के पर्याय बने वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की प्रथम कृति ‘किस्से कलमगिरी के’ का लोकार्पण जाल सभागृह में आयोजित हुआ। समारोह के अतिथि जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजय शंकर मेहता, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता महा विद्यालय भोपाल के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी थे। अध्यक्षता राष्ट्र कवि संचालक सत्यनारायण सत्तन ने की।
इंदौर ने स्वच्छता में लगातार आठवीं बार पहला स्थान पाकर यह सिद्ध कर दिया है कि जब नागरिक जागरूक हो जाएं तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं। जहां देश के कई शहरों में सफाईकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं इंदौर में उन्हें हार पहनाकर सम्मानित किया जा रहा है। यह सिर्फ स्वच्छता की जीत नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की जीत है। इंदौर ने साबित किया है कि शहर की खूबसूरती केवल सड़कें नहीं, बल्कि वहां के लोगों का दिल भी होता है।
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