रात में अपनी सोती हुई बेटी को देखते हुए चिंतन में डूबी महिला आईपीएस अधिकारी

ज़िम्मेदारियां अपनी-अपनी

एक सफल आईपीएस अधिकारी की ज़िंदगी का वह मोड़, जहाँ कर्तव्य, मातृत्व, परिवार और भविष्य की चिंता आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। यह संवेदनशील कहानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता के कठिन निर्णयों पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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सांवला रंग

“सांवला रंग” एक प्रेरक लघुकथा है जो समाज में व्याप्त रंगभेद की मानसिकता पर गहरा प्रहार करती है। कहानी में एक माँ अपने जीवन में झेले गए तिरस्कार को याद करते हुए संकल्प लेती है कि उसकी बेटी की पहचान उसके रंग से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और उपलब्धियों से होगी। वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम तब सामने आता है जब उसकी बेटी आई.पी.एस. अधिकारी बनकर पूरे शहर का गौरव बन जाती है।

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