अगर मुड़ के देखे, जो तू मुझको एक बार…
कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।

कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।
कुछ रिश्ते टूटकर भी दिल से नहीं मिटते. प्रस्तुत कविता ‘मुझे भूल जाने की आदत नहीं है’ में प्रेम, विरह, उपेक्षा और बिछड़ने की पीड़ा को बेहद संवेदनशील शब्दों में व्यक्त किया गया है. यह कविता उन भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जिन्हें इंसान चाहकर भी भुला नहीं पाता.
अग्निपरीक्षा, विरह और प्रतीक्षा की पीड़ा को सीता के दृष्टिकोण से व्यक्त करती यह कविता नारी की गरिमा, कर्तव्य और अंतर्मन के दर्द को सामने रखती है.
एक रात प्रेम और साथ से भरी थी, दूसरी रात सिर्फ़ स्मृतियों और मीठी टीस के साथ रह गई. यह कविता बीते प्रेम की उसी कसक को शब्द देती है.
प्रेम की प्यास, विरह की पीड़ा और टूटते संयम के बीच मन की गहरी बेचैनी को स्वर देती यह कविता आँसुओं से भरी ज़िंदगी और अधूरे प्रेम की भावनात्मक कहानी कहती है.
प्यासी पलकें प्रेम और विरह की उस बेचैनी को बयां करती हैं, जहाँ यादें हर पल साथ रहती हैं, मगर प्रेम की प्यास फिर भी अधूरी रह जाती है।
सावन की हर बूंद बीते प्रेम की यादों को फिर से जगा देती है। ‘मन का सावन’ विरह, प्रतीक्षा और मिलन की अधूरी चाहत को बारिश के रूपक में पिरोती भावपूर्ण कविता है।
“कौन हो तुम?” एक ऐसी भावपूर्ण कविता है, जिसमें प्रेम, विरह, प्रतीक्षा और आत्मिक जुड़ाव की अनुभूतियाँ शब्दों के माध्यम से जीवंत हो उठती हैं।