
बीना अजय मिश्रा
क्या भूल गया,
क्या याद रहा,
इसकी चिंता,
उसका संताप,
मेरी राहों का
दीपक कौन?
मेरी साँसों में
किसका ताप?
मेरी विस्मृति की
सरिता में
कल-कल-सा
कौन बहा जाता?
मेरे मेघों में
तड़ित बना, वह कौन,
जो राग विह्वल गाता?
जीवन भर देता काँटों में
फूलों में मधु के मादक रंग,
सुख-दुःख के युग
हों क्षण में शेष,
कैसी माया,
वह कौन मलंग?
वह कौन विकल,
बुदबुद जल-सा?
वह कौन सुनहली
रश्मि-किरण?
वह कौन निशा का
एक समर्पण?
वह कौन उषा की
मूक फिरन?
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