
नवनीत कमल, जगदलपुर
बापू तेरे देश का, बहुत बुरा है हाल।
छोटी-छोटी बात पर, करते सभी बवाल।।
सत्य मौन ही रह गया, मिला न कोई ठाँव।
बापू तेरे देश में, बढ़े झूठ के पाँव।।
मर्जी दीनदयाल की, समझ सका है कौन।
बापू तेरे देश में, देख रहे सब मौन।।
बापू तेरे देश के, अद्भुत हैं फरमान।
पूरे तो होते नहीं, दुखी सभी अरमान।।
कटुता मन में पालकर, भूले अपना ज्ञान।
बापू तेरे देश में, बनते सभी महान।।
बापू तेरे देश में, पनघट है सुनसान।
बिगड़ गया पर्यावरण, कब समझें इंसान।।
सूखा, बाढ़, अकाल है, सिमट गई है छाँव।
बापू तेरे देश में, ढूँढ रहे सब ठाँव।।
अवसरवादी लोग हैं, करते नित्य फसाद।
बापू तेरे देश में, पंछी ये आज़ाद।।
पल-पल नए प्रपंच हैं, अपना ही जयकार।
बापू तेरे देश में, भूले सब व्यवहार।।
नए दौर के लोग हैं, नए-नए अंदाज़।
बापू तेरे देश में, सबके अपने राज।।
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बहुत बहुत आभार 🙏
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