प्रेरणा
तलाश
ज़िंदगी में तलाश रास्तों की नहीं, मंज़िल की होती है। इंसान कभी-कभी जीवन की भीड़ में इतना आगे बढ़ जाता है कि खुद से ही दूर हो जाता है। सुख चैन नहीं लेने देता और दुख नींद छीन लेता है, पर हम मुस्कुराते हुए सब झेलते हैं जैसे बेफ़िक्री में गुज़र रही ज़िंदगी को बस देखते जा रहे हों। असल खोज जीवनभर खुद को पाने की ही रहती है।
वक्त की सुइयाँ
घड़ी की तीनों सुइयाँ जीवन के तीन मूल मंत्र सिखाती हैं. छोटी सुई धैर्य देती है, बड़ी सुई दिशा दिखाती है, और सेकंड की सुई हर पल की कीमत समझाती है। ये सुइयाँ रुकती नहीं, चाहे समय कैसा भी हो।हर टिक-टिक मानो याद दिलाती है.वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करता, वह बस आगे बढ़ता रहता है।
टूटना एक डाल का…
जीवन की आंधियाँ जब चलती हैं, तो सिर्फ डालियाँ ही नहीं, कई बार इंसान भी टूट जाते हैं . अपने ही सदाचार और शुभ कर्मों के बोझ से। इस टूटने में भी एक सच्चाई है जैसे परिंदों के घोंसले बिखर जाते हैं, पर वे नई जगह फिर से घर बना लेते हैं। कोयल की तान कहीं खो जाती है, मगर उसकी खोज जारी रहती है। यही जीवन का शाश्वत चक्र है . गिरना, बिखरना और फिर उठना।
तेरी बिंदिया रे…..
जहां शायरों ने, कवियों ने, औरत की सुंदरता के लिए अनेकों उपमानों का प्रयोग किया है, जैसे झील सी गहरी आंखें, हिरण सी सुंदर आंखें, सुराही दार गर्दन, मोरनी सी चाल, वहीं एक प्रेमी, अपनी प्रेमिका की बिंदी पर मर मिटा है,और वह चाहता है कि चाहे वह और कोई श्रृंगार करें या ना करें ,सिर्फ एक छोटी सी बिंदी वह अपने माथे पर लगा ले, और उसे किसी भी उपमान की जरूरत नहीं होगी।
दरिया और किनारा
कविता में दरिया को जीवन के संघर्ष और पवित्रता का प्रतीक बनाया गया है। दरिया मस्ती और ऊर्जा के साथ बढ़ती है, अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को पार करती है, किनारों से संबंध बनाए रखती है और दूसरों के कष्ट और पापों को समेटती है। यह अपने गंतव्य की ओर दृढ़ता और गति से बढ़ती है, अंततः समुद्र की विशाल बाहों में विलीन होकर अपने सफर का निष्कर्ष प्राप्त करती है। यह कविता दर्शाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, संयम, धैर्य और अपने मूल्यों के साथ मार्ग पर बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है।
उससे मिलना
बहुत समय बाद उससे मिलकर मन को एक अजीब सुकून मिला। मैं उसे याद करता था जब वह बहुत छोटी थी — बिल्कुल गुड़िया जैसी। अब वह शादी-शुदा है, पति और बच्चे हैं, और एक खुशहाल जीवन जी रही है। यह देखकर मेरे चेहरे पर स्वाभाविक हँसी खिल उठी।
इतनी सम्पन्नता के बावजूद उसकी फितरत नहीं बदली है। उसकी सम्मोहक और उन्मुक्त हँसी, अविश्वसनीय सरलता और निहायत शालीनता आज भी बरकरार है। मैं सोचता हूँ कि कैसे वह उन मर्यादाविहीन लोगों से निपटती होगी, जो हमारे बीच निशंक घूमते हैं। ऐसे लोग अपने बीच होने पर यह भरोसा दिलाते हैं कि दुनिया आज भी सुन्दर है। उनकी मौजूदगी यह अहसास कराती है कि अच्छाई और बुराई की सतत लड़ाई में अंततः कौन जीतेगा, यह सुनिश्चित है।
हमने सीख लिया जीना
ज़िंदगी के ज़ख्मों में भी मुस्कुराना हमने सीख लिया है. अपनों के दिए हुए ज़हर के घूंट को पीकर भी अब हमें जीने की आदत हो गई है. हमने हंसी में अपने दर्द को छिपाना और दिल में ग़मों को दबाना सीख लिया है. अपनों के धोखे और वार से खुद को संभालना और दूसरों का हमदर्द बनकर उनके ज़ख्मों पर मरहम लगाना भी आ गया है. घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर जब हमने सांस ली, तब दुनिया की मक्कारी और चालें पढ़ना सीख लिया. इस काँटों से भरी बस्ती में रहकर भी हमने दूसरों तक खुशबू पहुँचाना सीख लिया. हमें अब यह भी समझ आ गया है कि मां-बाप के सिवा कोई सच्चा हितैषी नहीं होता, इसलिए दुनिया से थोड़ा किनारा करना भी हमने सीख लिया है.
कीचड़ और झंझटों से भरी इस दुनिया में रहते हुए हमने खुद को ईश्वर भक्ति में चमकाना सीख लिया है. अब दर्द भी हमें डराता नहीं, क्योंकि हमने सचमुच “जीना” सीख लिया है.
मंजिल मिल ही जायेगी
मंजिल पाने के लिए निरंतर प्रयास और पूरे विश्वास के साथ कदम बढ़ाते रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है। चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, या कश्तियों में छेद हों, लेकिन हौसला और रवानगी कभी कम नहीं होती। अंधकार में बिखरे जाल और पाश हमारी कोशिशों को रोकने की कोशिश करेंगे, पर जज्बे की शमा जलाकर हम उनसे मुक्त हो सकते हैं।
हर तिनका, हर छोटा प्रयास मिलकर एक मजबूत घोंसला बनाता है, और आंधियों में भी यह हौंसला कायम रहता है। मुश्किलें देखने के बाद भी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेहनत, अभ्यास और लगन से हर समस्या का हल निकलता है।
