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हे श्रीकृष्ण! जन्म लो फिर से

मथुरा की कारागार में श्रीकृष्ण जन्म और जन्माष्टमी के पावन दृश्य को दर्शाती हिंदी कविता प्रेम, सत्य, धर्म और मानवता का संदेश लेकर फिर से जन्म लें श्रीकृष्ण.

डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’

मथुरा की उस रात में,
जब चारों ओर अँधियारा था,
टूट रही थी आस धरा की,
हर मन बेहद हारा था।

तभी देवकी की कोख से,
प्रेम का सूरज आया था,
कारागार की दीवारों ने भी,
जय-जय श्रीकृष्ण गाया था।

बाबा नंद के आँगन पहुँचे तो,
खुशियों ने शृंगार किया,
माँ यशोदा की ममता ने उनको,
पलकों पर साकार किया।

जिसने गीता का ज्ञान दिया,
ये वही जग का रखवाला है,
जिसके नाम से मिट जाए भय,
ये वही नंद का लाला है।

हे श्रीकृष्ण! जन्म लो फिर से,
मन के तम को हरने को,
प्रेम, सत्य और धर्म जगाने,
मानवता को सँवारने को॥

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